दिल्ली, 9 अक्टूबर, जाने-माने शिया धर्मगुरु और नेता मौलाना हसन अली रजानी ने ईरान की क्षेत्रीय नीतियों और उससे जुड़े हथियारबंद ग्रुप्स की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में मुस्लिम देशों का प्रॉक्सी वॉर ज़ोन बनना मंज़ूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने यमन में हूथी हथियारबंद ग्रुप्स और लेबनान में ईरान के सपोर्ट वाली हथियारबंद गतिविधियों का ज़िक्र किया और कहा कि इस इलाके में ताकत हासिल करने के लिए हथियारबंद ग्रुप्स का इस्तेमाल आम मुसलमानों के लिए और ज़्यादा मुश्किलें खड़ी कर रहा है। रजानी ने कहा कि अगर ईरान सच में मुस्लिम दुनिया के हितों का समर्थन करता है, तो उसे सबसे पहले मुस्लिम देशों की आज़ादी और उनके नागरिकों की जान-माल का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मिसाइलें, ड्रोन और हथियारबंद ऑपरेशन क्षेत्रीय समस्याओं का पक्का हल नहीं हैं, बल्कि तनाव बढ़ाते हैं। मौलाना रजानी ने ईरान से प्रॉक्सी पॉलिटिक्स छोड़कर सीधी डिप्लोमेसी और बातचीत अपनाने की अपील की। उन्होंने साफ़ किया कि आम ईरानियों या किसी भी पंथ के मुसलमानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। आपत्तियाँ मुख्य रूप से कुछ खास नीतियों और हथियारबंद कार्रवाइयों पर हैं। रजनी ने मुस्लिम देशों और इंटरनेशनल कम्युनिटी से अपील की कि वे सिविलियन प्रोटेक्शन, नेशनल सॉवरेनिटी और नेविगेशन की आज़ादी के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए असरदार डिप्लोमैटिक कदम उठाएं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मुस्लिम दुनिया को और लड़ाइयों की नहीं, बल्कि शांति, सॉवरेनिटी, आपसी सम्मान और ज़िम्मेदार डिप्लोमेसी की ज़रूरत है।
मौलाना रजनी ने साफ़-साफ़ कहा कि ईरान की प्रॉक्सी पॉलिटिक्स ने मुस्लिम दुनिया को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है, जिसमें अब तक यमन, सीरिया, लेबनान, इराक और अफ्रीकी देशों में लाखों मुसलमान मारे जा चुके हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दुनिया भर के मुस्लिम देशों में ईरान का हथियारबंद दखल अब बंद होना चाहिए।